मापुसा ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) कोर्ट ने चर्चित बर्च आगजनी (Birch Fire) मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपियों गौरव लुथरा और सौरभ लुथरा की पुलिस हिरासत को 29 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। यह फैसला जांच एजेंसियों की उस मांग के बाद आया, जिसमें उन्होंने मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की गहन जांच के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता बताई थी।
बर्च आगजनी मामला हाल के दिनों में क्षेत्र में सबसे अधिक चर्चा में रहा है। इस घटना में कथित तौर पर बर्च परिसर में आग लगाई गई, जिससे भारी नुकसान हुआ और स्थानीय लोगों में भय का माहौल बन गया। आगजनी की इस घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की और सबूतों के आधार पर गौरव लुथरा और सौरभ लुथरा को हिरासत में लिया।
पुलिस का दावा है कि आग लगने की घटना सुनियोजित हो सकती है और इसके पीछे ठोस कारण व साजिश की आशंका है। इसी कड़ी में दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
मापुसा JMFC कोर्ट में पुलिस ने आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की अर्जी दाखिल करते हुए कहा कि
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अभी जांच पूरी नहीं हुई है,
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डिजिटल सबूतों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है,
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आगजनी के पीछे संभावित साजिश और अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाना बाकी है।
पुलिस ने यह भी दलील दी कि आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ (confrontation) जरूरी है, ताकि घटना की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
बचाव पक्ष की ओर से हिरासत बढ़ाने का विरोध किया गया और कहा गया कि पुलिस को पहले ही पर्याप्त समय मिल चुका है। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच की प्रगति को देखते हुए पुलिस की दलीलों को स्वीकार कर लिया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद JMFC कोर्ट ने यह माना कि जांच अभी निर्णायक मोड़ पर है और कुछ अहम जानकारियां सामने आना बाकी हैं। इसी आधार पर अदालत ने गौरव और सौरभ लुथरा की पुलिस हिरासत 29 दिसंबर तक बढ़ाने का आदेश दिया।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि हिरासत के दौरान आरोपियों के कानूनी अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाए और किसी भी तरह की अनियमितता न हो।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दे रही है:
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आग लगने का सटीक कारण और तरीका
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घटना के समय आरोपियों की मौजूदगी और गतिविधियां
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सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन डेटा
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किसी अन्य व्यक्ति या समूह की संलिप्तता
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संभावित आर्थिक या व्यक्तिगत विवाद, जो आगजनी का कारण बन सकते हैं
पुलिस का मानना है कि हिरासत बढ़ने से वे मामले की तह तक पहुंच सकेंगे और सच्चाई सामने आएगी।
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी चिंता देखी जा रही है। बर्च आगजनी से प्रभावित क्षेत्र के निवासियों ने पुलिस से सख्त कार्रवाई और त्वरित न्याय की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती हैं।
कुछ सामाजिक संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए, वहीं निर्दोषों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
अब 29 दिसंबर को आरोपियों को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा। उस दिन पुलिस जांच की प्रगति रिपोर्ट सौंपेगी और यह तय होगा कि
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हिरासत और बढ़ाई जाए,
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या आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए,
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अथवा अन्य कानूनी कदम उठाए जाएं।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है, खासकर अगर जांच में नए तथ्य या नए आरोपी सामने आते हैं।










