भारत एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा मंच पर अपनी धमक दिखाने के लिए तैयार है। भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वावधान में ‘इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2026’ का आयोजन 27 से 30 जनवरी 2026 तक गोवा में किया जाएगा। इस आयोजन में दुनिया भर के ऊर्जा मंत्री, दिग्गज कंपनियों के सीईओ और नीति निर्माता हिस्सा लेंगे।
क्यों खास है IEW 2026?
यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत दुनिया की ऊर्जा मांग का केंद्र बनता जा रहा है। ‘इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी’ (IEA) के अनुसार, साल 2050 तक दुनिया की कुल ऊर्जा मांग में अकेले भारत की हिस्सेदारी 23% से अधिक होने का अनुमान है।
कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:
* ऊर्जा सुरक्षा और निवेश: इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और भारत के ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।
* ग्रीन एनर्जी पर जोर: हाइड्रोजन इकोनॉमी, टिकाऊ ईंधन (Sustainable Fuels) और कार्बन उत्सर्जन को कम करने (Decarbonisation) जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
* ऐतिहासिक सुधार: सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए ‘ऑयलफील्ड्स (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 2025’ को भी दुनिया के सामने पेश किया जाएगा, जो तेल और गैस क्षेत्र में व्यापार को आसान बनाता है।
भारत की उपलब्धियां:
प्रेस रिलीज के अनुसार, भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में कई मील के पत्थर छुए हैं:
* इथेनॉल प्रोग्राम: इथेनॉल ब्लेंडिंग के जरिए भारत ने अब तक ₹1.59 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है। साथ ही, किसानों को ₹1.39 लाख करोड़ का सीधा भुगतान किया गया है।
* गैस इंफ्रास्ट्रक्चर: घरेलू पीएनजी (PNG) कनेक्शनों की संख्या 25 लाख से बढ़कर 1.59 करोड़ से अधिक हो गई है।
* कीमतों पर नियंत्रण: वैश्विक अस्थिरता के बावजूद, केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास किया है।
निष्कर्ष:
IEW 2026 न केवल भारत की ऊर्जा शक्ति का प्रदर्शन करेगा, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के वैश्विक संकल्प को भी मजबूती देगा। चार दिनों तक चलने वाले इस इवेंट में 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।









