आज गोवा में नई पुस्तक का भव्य विमोचन, साहित्य और संस्कृति को मिला नया मंच

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आज गोवा में साहित्य प्रेमियों के लिए एक खास और यादगार दिन रहा, जब राज्य में एक नई पुस्तक का औपचारिक रूप से विमोचन किया गया। यह पुस्तक विमोचन कार्यक्रम गोवा की सांस्कृतिक राजधानी माने जाने वाले क्षेत्र में आयोजित किया गया, जिसमें लेखकों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, छात्रों और कला-संस्कृति से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल पुस्तक का लोकार्पण करना था, बल्कि समाज में पढ़ने-लिखने की संस्कृति को बढ़ावा देना भी रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया। मंच पर मौजूद वक्ताओं ने पुस्तक और उसके लेखक के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि आज के डिजिटल युग में भी किताबों का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि अच्छी किताबें समाज को नई दिशा देने का काम करती हैं।

विमोचित पुस्तक समकालीन विषयों पर आधारित है, जिसमें समाज, संस्कृति, इतिहास और मानवीय संवेदनाओं को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। लेखक ने अपनी रचना के माध्यम से पाठकों को सोचने, समझने और आत्ममंथन करने का अवसर दिया है। पुस्तक की भाषा सरल, प्रभावशाली और आम पाठक के लिए सहज बताई गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि गोवा केवल पर्यटन का केंद्र नहीं है, बल्कि यह साहित्य, कला और संस्कृति की भी समृद्ध भूमि है। ऐसे पुस्तक विमोचन कार्यक्रम गोवा की बौद्धिक पहचान को और मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को किताबों से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

पुस्तक के लेखक ने अपने संबोधन में सभी अतिथियों और पाठकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को लिखने के पीछे उनका उद्देश्य समाज की सच्चाइयों को शब्दों में पिरोना और पाठकों तक एक सार्थक संदेश पहुँचाना है। लेखक ने कहा कि एक किताब केवल कागज और स्याही नहीं होती, बल्कि यह लेखक और पाठक के बीच एक जीवंत संवाद होती है।

कार्यक्रम के दौरान साहित्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने बदलते समय में लेखन की भूमिका, युवाओं की साहित्य में रुचि और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे। यह चर्चा कार्यक्रम को केवल एक औपचारिक आयोजन न बनाकर एक सार्थक साहित्यिक संवाद में बदलने में सफल रही।

पुस्तक विमोचन के बाद प्रश्न-उत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने लेखक से पुस्तक से जुड़े सवाल पूछे। लेखक ने सभी सवालों के उत्तर सहजता और स्पष्टता से दिए। इस सत्र में छात्रों और युवा पाठकों की भागीदारी विशेष रूप से देखने लायक रही।

कार्यक्रम में मौजूद साहित्य प्रेमियों ने पुस्तक के विषय और प्रस्तुति की सराहना की। कई लोगों ने कहा कि ऐसी साहित्यिक गतिविधियाँ नियमित रूप से होनी चाहिए, ताकि गोवा की साहित्यिक परंपरा को नई ऊर्जा मिल सके। कुछ पाठकों ने यह भी कहा कि पुस्तक उन्हें अपने जीवन और समाज को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती है।

आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम आगे भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि नए लेखकों को मंच मिल सके और पाठकों को अच्छी किताबों से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि गोवा में साहित्यिक माहौल को और सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। अंत में उपस्थित अतिथियों और दर्शकों के लिए अनौपचारिक बातचीत और पुस्तक हस्ताक्षर सत्र (बुक साइनिंग) का आयोजन किया गया, जिसमें लेखक ने पाठकों से सीधे संवाद किया।

कुल मिलाकर, आज गोवा में हुआ यह पुस्तक विमोचन कार्यक्रम साहित्य, विचार और संस्कृति का एक सुंदर संगम साबित हुआ। ऐसे आयोजन न केवल लेखकों को प्रोत्साहन देते हैं, बल्कि समाज में ज्ञान और रचनात्मकता के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Goa Khabar Nama
Author: Goa Khabar Nama

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