पणजी: गोवा की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के अध्यक्ष और विधायक विजय सरदेसाई ने ‘श्रीफल’ टिप्पणी को लेकर भाजपा नेता सिद्धेश नाइक को सार्वजनिक रूप से संयम बरतने की सलाह दी है। सरदेसाई ने कहा कि राजनीति में शब्दों का चयन बेहद जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे बयान समाज में गलत संदेश दे सकते हैं और अनावश्यक विवाद को जन्म देते हैं।
विजय सरदेसाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गोवा एक शांतिप्रिय और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य है, जहां सभी समुदायों और वर्गों के लोग सद्भाव के साथ रहते हैं। ऐसे में किसी भी नेता द्वारा ऐसे शब्दों का प्रयोग, जो किसी विशेष वर्ग, परंपरा या भावना को ठेस पहुंचा सकते हों, न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी नुकसानदेह है।
हाल ही में भाजपा नेता सिद्धेश नाइक द्वारा दिए गए एक बयान में ‘श्रीफल’ शब्द का इस्तेमाल किया गया, जिसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने इस टिप्पणी को आपत्तिजनक और असंवेदनशील बताया। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर बहस छिड़ गई, जहां कुछ लोग इसे सांस्कृतिक संदर्भ से जोड़कर देख रहे हैं, तो वहीं कई इसे राजनीतिक व्यंग्य के नाम पर मर्यादा का उल्लंघन मान रहे हैं।
विजय सरदेसाई ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“राजनीति में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन शब्दों की मर्यादा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। सिद्धेश नाइक जैसे युवा नेता से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बयानों में संयम और समझदारी दिखाएं।”
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे बयान जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटका देते हैं। गोवा आज बेरोजगारी, महंगाई, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन से जुड़े संकट और युवाओं के भविष्य जैसे गंभीर सवालों से जूझ रहा है। इन मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय अगर नेता बयानबाज़ी में उलझेंगे तो जनता का भरोसा राजनीति से उठता चला जाएगा।
सरदेसाई ने इस मौके पर भाजपा नेतृत्व पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं को अतिरिक्त जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए क्योंकि उनके शब्दों का असर पूरे समाज पर पड़ता है।
“जब सत्ता में बैठे लोग हल्के या विवादित बयान देते हैं, तो उसका संदेश नीचे तक जाता है और समाज में विभाजन की भावना को बढ़ावा मिलता है,” उन्होंने कहा।
गोवा फॉरवर्ड पार्टी प्रमुख ने गोवा की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य विविधता में एकता का उदाहरण है। यहां हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य समुदाय सदियों से साथ रहते आए हैं।
उन्होंने कहा,
“गोवा की पहचान भाईचारे, आपसी सम्मान और सह-अस्तित्व से है। किसी भी प्रकार की टिप्पणी जो इस संतुलन को बिगाड़े, उसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।”
इस बयान के बाद गोवा की राजनीति में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने विजय सरदेसाई के रुख का समर्थन किया है और कहा है कि नेताओं को सार्वजनिक मंच पर बोलते समय अधिक जिम्मेदार होना चाहिए। वहीं भाजपा की ओर से कुछ नेताओं ने सिद्धेश नाइक के बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में पेश किया गया है।
हालांकि, इस सफाई के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं।
‘श्रीफल’ टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस चल रही है। कुछ यूजर्स ने विजय सरदेसाई के बयान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सही समय पर सही बात कही है। वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक अवसरवादिता बता रहे हैं।
फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सऐप ग्रुप्स में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या गोवा की राजनीति मुद्दों पर केंद्रित रहेगी या बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप में उलझी रहेगी। विजय सरदेसाई का “संयम बरतें” वाला संदेश सिर्फ सिद्धेश नाइक के लिए नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक वर्ग के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।










