मापुसा (गोवा):
गोवा के मापुसा स्थित न्यायालय ने बहुचर्चित बर्च फायर कांड (Birch Fire Case) में अहम फैसला सुनाते हुए दो मैनेजरों को सशर्त जमानत प्रदान की है, जबकि मामले में नामजद जनरल मैनेजर को किसी भी प्रकार की राहत देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। अदालत के इस निर्णय को औद्योगिक सुरक्षा, प्रबंधन की जवाबदेही और न्यायिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
यह मामला गोवा के एक प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठान “बर्च” में लगी भीषण आग से जुड़ा है, जिसमें न केवल भारी आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा और कंपनी प्रबंधन की लापरवाही को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
मामले की पृष्ठभूमि
बर्च कंपनी के परिसर में कुछ माह पूर्व अचानक भीषण आग लग गई थी। आग इतनी भयावह थी कि दमकल विभाग को घंटों की मशक्कत के बाद उस पर काबू पाना पड़ा। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आग लगने के पीछे सुरक्षा मानकों की अनदेखी, ज्वलनशील पदार्थों का अनुचित भंडारण और अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी जैसी गंभीर लापरवाहियाँ थीं।
इस घटना के बाद पुलिस ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में कंपनी के जनरल मैनेजर, दो मैनेजरों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सामने आई।
अदालत में सुनवाई
मामले की सुनवाई मापुसा की अदालत में हुई, जहाँ अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आग की घटना आकस्मिक नहीं बल्कि प्रबंधन की घोर लापरवाही का नतीजा थी। अभियोजन ने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन न करना एक दंडनीय अपराध है, खासकर तब जब इससे कर्मचारियों की जान को खतरा उत्पन्न हुआ हो।
वहीं, बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि दोनों मैनेजर केवल आदेशों का पालन कर रहे थे और नीतिगत फैसले जनरल मैनेजर द्वारा लिए जाते थे। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि दोनों मैनेजर जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और उनके फरार होने की कोई आशंका नहीं है।
अदालत का फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया दोनों मैनेजरों की भूमिका सीमित प्रतीत होती है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें सख्त शर्तों के साथ जमानत प्रदान करने का आदेश दिया।
हालांकि, अदालत ने जनरल मैनेजर के मामले में अलग रुख अपनाया। न्यायालय ने कहा कि जनरल मैनेजर की भूमिका अधिक गंभीर और निर्णयात्मक रही है। सुरक्षा मानकों को लागू करने और निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी उन्हीं पर थी, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसी कारण अदालत ने जनरल मैनेजर को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी को हिरासत में रखना आवश्यक है।
जमानत की शर्तें
अदालत द्वारा जिन दो मैनेजरों को जमानत दी गई है, उनके लिए कई सख्त शर्तें तय की गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
-
जांच में पूर्ण सहयोग करना
-
बिना अनुमति गोवा से बाहर न जाना
-
किसी भी गवाह को प्रभावित न करना
-
नियमित रूप से पुलिस के समक्ष उपस्थित होना
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इन शर्तों का उल्लंघन किया गया, तो जमानत तत्काल रद्द की जा सकती है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जनरल मैनेजर की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि संचालन और सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई थी। आग की घटना से पहले भी सुरक्षा ऑडिट को नजरअंदाज किए जाने के संकेत मिले हैं। ऐसे में आरोपी को जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है।
अदालत के इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में इसे एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा से समझौता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, आम जनता और श्रमिक संगठनों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है।
श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह फैसला उन कंपनियों के लिए चेतावनी है जो मुनाफे के चक्कर में कर्मचारियों की जान को खतरे में डालती हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। अग्नि सुरक्षा विभाग, औद्योगिक सुरक्षा एजेंसियां और पर्यावरण विभाग की रिपोर्टों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।
बर्च फायर कांड में मापुसा अदालत का फैसला यह स्पष्ट करता है कि कानून के सामने पद और पदवी का कोई महत्व नहीं होता। जहाँ सीमित भूमिका निभाने वालों को सशर्त राहत दी गई, वहीं मुख्य जिम्मेदार को कठोर रुख का सामना करना पड़ा। यह फैसला न केवल इस मामले के लिए बल्कि भविष्य में औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।










