गोवा, भारत का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण राज्य, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, खूबसूरत समुद्र तटों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए जाना जाता है। 22 दिसंबर 2025 को आयोजित गोवा जिला पंचायत (जिप) चुनावों ने राज्य की स्थानीय शासन व्यवस्था को नई दिशा प्रदान की है। ये चुनाव राज्य के दो जिलों—उत्तर गोवा और दक्षिण गोवा—में कुल 50 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए लड़े गए, जहां 226 से अधिक उम्मीदवारों ने भाग लिया। मतदान प्रतिशत 70.81% रहा, जो राज्य की सक्रिय नागरिक भागीदारी को दर्शाता है।
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और 29 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। उसके गठबंधन साथी महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) को 3 सीटें मिलीं, जिससे एनडीए का कुल योग 32 सीटों पर पहुंच गया। कांग्रेस को 10 सीटें प्राप्त हुईं, जो दक्षिण गोवा में उसकी पारंपरिक मजबूती को कुछ हद तक बरकरार रखती हैं। क्रांतिकारी गोवांकर पार्टी (आरजीपी) को 2, आम आदमी पार्टी (आप) को 1, गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) को 1 और स्वतंत्र उम्मीदवारों को 4 सीटें मिलीं। यह परिणाम राज्य की राजनीति में भाजपा की बढ़ती पकड़ को रेखांकित करता है, जबकि विपक्षी दलों को चुनौतियां बनी हुई हैं।
जिला पंचायतें राज्य के ग्रामीण विकास का आधार हैं। ये स्थानीय स्तर पर सड़कें, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन करती हैं। गोवा में जिप चुनाव हर पांच वर्ष में होते हैं, और 2025 का यह चुनाव कोविड-19 के बाद की आर्थिक चुनौतियों, पर्यटन क्षेत्र की मंदी और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा। भाजपा ने विकास और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया, जबकि कांग्रेस ने सामाजिक न्याय और स्थानीय अधिकारों पर फोकस किया। आरजीपी जैसी क्षेत्रीय पार्टियां गोवा की पहचान और भूमि अधिकारों पर सक्रिय रहीं।
इस रिपोर्ट में हम विजेताओं की पूरी सूची प्रस्तुत कर रहे हैं, जो उत्तर गोवा (अरंबोल से क्वेरिम तक, कुल 24 सीटें) और दक्षिण गोवा (नागरगांव से कोर्टालिम तक, कुल 26 सीटें) के अनुसार वर्गीकृत है। प्रत्येक विजेता के बारे में संक्षिप्त जानकारी भी दी गई है, जो उनके पृष्ठभूमि, चुनावी वादों और महत्व को उजागर करती है। यह सूची आधिकारिक परिणामों पर आधारित है और राज्य निर्वाचन आयोग के डेटा से प्रेरित है। हमारा उद्देश्य पाठकों को न केवल सूची प्रदान करना है, बल्कि चुनाव के व्यापक संदर्भ को समझाने में मदद करना है, ताकि गोवा की राजनीतिक गतिशीलता स्पष्ट हो सके।
उत्तर गोवा जिला पंचायत: विजेताओं की सूची
उत्तर गोवा, जो पर्यटन और कृषि का केंद्र है, में भाजपा ने 18 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 2, एमजीपी को 2 और स्वतंत्रों को 2 मिलीं। यह क्षेत्र पर्यावरणीय मुद्दों जैसे समुद्र तट संरक्षण और भूमि अधिग्रहण से प्रभावित रहा।
- अरंबोल: राधिका पालेकर (स्वतंत्र) – स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता राधिका ने पर्यटन-आधारित विकास पर जोर दिया। उनकी जीत स्वतंत्र उम्मीदवारों की अप्रत्याशित सफलता का प्रतीक है।
- मोरजिम: तारा हडफडकर (एमजीपी) – एमजीपी की वरिष्ठ नेता, जो ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने का वादा किया।
- धरगल: श्रीकृष्ण रविंद्र हरमलकर (भाजपा) – युवा नेता, जिन्होंने बुनियादी ढांचे पर फोकस किया। उनकी जीत भाजपा की युवा शाखा की ताकत दिखाती है।
- टॉरसेम: सिद्धेश पेडनेकर (भाजपा) – शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के वकील। इस क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता लंबे समय से बनी हुई है।
- सियोलिम: माहेश्वर मनोहर गोवेकर (भाजपा) – अनुभवी पंचायत सदस्य, जो सड़क निर्माण परियोजनाओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
- कोलवाले: कविता किरण कांडोलकर (स्वतंत्र) – महिला सशक्तिकरण की पैरोकार, जिन्होंने लैंगिक समानता के मुद्दे उठाए।
- अल्डोना: मैरी उर्फ मारिया मेनेजेस (कांग्रेस) – कांग्रेस की मजबूत उम्मीदवार, जो सामाजिक कल्याण योजनाओं पर केंद्रित रहीं।
- सिरसाई: नीलेश कंबली (कांग्रेस) – युवा चेहरा, जिन्होंने बेरोजगारी कम करने के वादे किए।
- अंजुना: नारायण लाडू मांद्रेकर (भाजपा) – पर्यटन उद्योग से जुड़े, समुद्र तट संरक्षण के पक्षधर।
- कैलंगुट: फ्रांजिलिया रोड्रिग्स (भाजपा) – स्थानीय व्यवसायी, जिन्होंने आर्थिक विकास पर जोर दिया।
- सोकोर्रो: अमित देवीदास असनोडकर (भाजपा) – स्वास्थ्य सेवाओं के सुधारक।
- रेज-मागोस: रेशमा बांदोडकर (भाजपा) – महिला प्रतिनिधि, शिक्षा पर फोकस।
- पेनहा-डे-फ्रांका: संदीप सलगांवकर (भाजपा) – जल संरक्षण विशेषज्ञ।
- सेंट क्रूज: एस्पेरेंसा ब्रागांका (आरजीपी) – आरजीपी की प्रमुख आवाज, भूमि अधिकारों पर सक्रिय।
- तलेगांव: रगुवीर कुंकुलेनकर (भाजपा) – बुनियादी सुविधाओं के वकील।
- चिंबेल: गौरी प्रमोद कामत (भाजपा) – सामाजिक कार्यकर्ता।
- कोरलिम: सिद्धेश श्रीपाद नायक (भाजपा) – युवा उद्यमी।
- सेंट लॉरेंस: त्रुप्ति विश्वनाथ बकाल (आरजीपी) – पर्यावरण संरक्षण की पैरोकार।
- लटंबार्सेम: पद्माकर अर्जुन मलिक (भाजपा) – कृषि विकास पर फोकस।
- कारापुर-सर्वन: माहेश अनंत सावंत (भाजपा) – ग्रामीण रोजगार योजनाओं के समर्थक।
- माएम: कुंदा मांद्रेकर (भाजपा) – अनुभवी नेता।
- पाले: सुंदर नायक (भाजपा) – स्वास्थ्य और शिक्षा।
- होंडा: नामदेव बाबल चारी (भाजपा) – स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय।
- क्वेरिम: नीलेश शंभा परवार (भाजपा) – सीमावर्ती क्षेत्र के विकास पर जोर।
दक्षिण गोवा जिला पंचायत: विजेताओं की सूची
दक्षिण गोवा, जो कृषि और खनन से प्रभावित है, में भाजपा ने 11 सीटें जीतीं, कांग्रेस को 8, स्वतंत्र को 1, जीएफपी को 1, आप को 1 और एमजीपी को 1। यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा, लेकिन भाजपा ने यहां भी सेंध लगाई।
- नागरगांव: प्रेमनाथ दालवी (भाजपा) – खनन प्रभावित क्षेत्र के पुनर्वास पर फोकस।
- उसगांव-गंजेम: समीक्षा वामन नायक (भाजपा) – महिला सशक्तिकरण।
- बेटकी-कांडोला: सुनील जालमी (स्वतंत्र) – स्थानीय किसान नेता।
- कुर्ती: प्रितेश प्रेमानंद गौंकर (भाजपा) – औद्योगिक विकास।
- वेलिंग-प्रियोल: अदिति देवीदास गौड़े (एमजीपी) – युवा प्रतिनिधि।
- क्वेला: गणपत नायक (एमजीपी) – ग्रामीण बुनियादी ढांचा।
- बोरिम: पूनम चंद्रकांत समंत (भाजपा) – शिक्षा सुधार।
- सिरोदा: डॉ. गौरी सुभाष शिरोडकर (भाजपा) – स्वास्थ्य विशेषज्ञ।
- रायया: इनासिना लुईस पिंटो (जीएफपी) – क्षेत्रीय पार्टी की सफलता।
- नुवेम: एंथनी ब्रागांजा (कांग्रेस) – सामाजिक न्याय।
- कोल्वा: एंटोनियो फर्नांडिस (आप) – आप की एकमात्र सीट, भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडा।
- वेलिम: जुलियो फेटनांडिस (कांग्रेस) – किसान मुद्दे।
- बेनौलिम: लुइजा पेरेरा ई रोड्रिग्स (कांग्रेस) – महिला अधिकार।
- डावोरलिम: फ्लोरिना डैनी फर्नांडिस (कांग्रेस) – स्थानीय विकास।
- गुइर्डोलिम: संजय वेलिप (कांग्रेस) – आदिवासी प्रतिनिधित्व।
- कुर्तोरिम: अस्त्रा रांजिले दा सिल्वा (कांग्रेस) – पर्यावरण।
- नावेलिम: मालीफा कार्डोजो (कांग्रेस) – युवा नेता।
- सनवोर्डेम: मोहन परशुराम गौंकर (भाजपा) – खनन पुनर्वास।
- धरबंदोरा: रूपेश रामनाथ देसाई (भाजपा) – कृषि।
- रिवोना: राजश्री (राजेश्री) राजेश गौंकर (भाजपा) – सामाजिक कार्य।
- झेल्डेम: शिद्धार्थ श्रीनिवास देसाई (भाजपा) – बुनियादी सुविधाएं।
- बार्सेम: अंजली अर्जुन वेलिप (भाजपा) – आदिवासी मुद्दे।
- कोला: सुमित्रा पागी (कांग्रेस) – ग्रामीण महिला।
- पॉइंगुइनिम: अजय लोलेनकर (भाजपा) – पर्यटन।
- सांक्वाले: सुनील महादेव गावास (भाजपा) – स्वास्थ्य।
- कोर्टालिम: मर्सियाना वास (स्वतंत्र) – स्थानीय कार्यकर्ता।
चुनाव का विस्तृत विश्लेषण और प्रभाव
ये परिणाम गोवा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ हैं। भाजपा की 29 सीटों की जीत उसके संगठनात्मक मजबूती और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की लोकप्रियता को दर्शाती है। पार्टी ने ग्रामीण क्षेत्रों में ‘मोदी की गारंटी’ जैसे केंद्रीय योजनाओं का प्रचार किया, जो मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रहा। दक्षिण गोवा में कांग्रेस की 8 सीटें उसके पारंपरिक वोट बैंक को बचाए रखने का संकेत हैं, लेकिन उत्तर में केवल 2 सीटें हासिल करना विपक्ष की कमजोरी दिखाती हैं।
आरजीपी की 2 सीटें (सेंट क्रूज और सेंट लॉरेंस) गोवा की क्षेत्रीय अस्मिता को मजबूत करती हैं, जबकि आप की कोल्वा सीट अरविंद केजरीवाल की पार्टी के विस्तार की शुरुआत हो सकती है। स्वतंत्र उम्मीदवारों की 4 जीतें स्थानीय मुद्दों की प्रासंगिकता को उजागर करती हैं। कुल मिलाकर, एनडीए का बहुमत जिप में स्थिरता सुनिश्चित करेगा, लेकिन विपक्ष को आंतरिक सुधारों की जरूरत है।
पिछले 2020 चुनावों की तुलना करें तो भाजपा ने 25 से 29 सीटें बढ़ाईं, जबकि कांग्रेस 12 से घटकर 10 पर सिमट गई। यह बदलाव पर्यटन मंदी, महंगाई और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों से प्रभावित रहा। भविष्य में, ये विजेता ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे—जैसे सौर ऊर्जा परियोजनाएं, जैविक खेती और महिला सशक्तिकरण। गोवा सरकार को इनकी सिफारिशों पर अमल करना होगा।
यह चुनाव लोकतंत्र की जीत है, जहां 70% से अधिक मतदाताओं ने भाग लिया। युवा और महिला उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या (करीब 40%) सकारात्मक बदलाव का संकेत है। गोवा के नागरिकों को उम्मीद है कि ये नेता वादों पर खरे उतरेंगे, ताकि राज्य ‘सुनहरे गोवा’ का सपना साकार कर सके।










