मापुसा शहर में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध बोडगेश्वर जात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के बाद अब राहत की खबर सामने आई है। मापुसा के बोडगेश्वर मंदिर परिसर में लगाए गए एक विशाल झूले (जायंट व्हील) को लेकर चल रहा विवाद उस समय समाप्त हो गया, जब मामलतदार ने झूले की सील हटाने का आदेश दिया। इस फैसले से जात्रा में आए श्रद्धालुओं, स्थानीय व्यापारियों और मनोरंजन के साधनों से जुड़े लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
बोडगेश्वर जात्रा गोवा की सबसे प्रसिद्ध और भीड़भाड़ वाली धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस जात्रा में शामिल होते हैं। जात्रा के दौरान बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के लिए विभिन्न झूले, खेल और अस्थायी दुकानें लगाई जाती हैं। इसी क्रम में एक बड़ा जायंट व्हील (विशाल झूला) भी लगाया गया था।
हालांकि, प्रशासन द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान कुछ सुरक्षा और अनुमति संबंधी कमियों के चलते इस झूले को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया था। इस कार्रवाई के बाद झूला संचालकों के साथ-साथ जात्रा में आए लोगों में नाराजगी देखी गई, क्योंकि यह झूला आकर्षण का मुख्य केंद्र था।
सूत्रों के अनुसार, मामलतदार कार्यालय को शिकायतें प्राप्त हुई थीं कि झूले के लिए आवश्यक दस्तावेज़ और सुरक्षा प्रमाणपत्र पूरे नहीं थे। इसके बाद प्रशासन ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए झूले को सील कर दिया, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
हालांकि, झूला संचालकों ने तुरंत आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत किए और सुरक्षा मानकों को पूरा करने का दावा किया। इसके बाद मामलतदार ने संबंधित विभागों से रिपोर्ट मंगवाई और स्थल का पुनः निरीक्षण करवाया।
सभी दस्तावेज़ों और सुरक्षा जांच के बाद जब यह स्पष्ट हो गया कि झूला अब सभी मानकों पर खरा उतरता है, तब मामलतदार ने झूले की सील हटाने का आदेश दिया। इस निर्णय के बाद झूले को फिर से आम जनता के लिए खोल दिया गया।
प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है, और भविष्य में भी किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
झूले की सील हटने के बाद जात्रा स्थल पर रौनक फिर से लौट आई। खासकर बच्चे और युवा वर्ग इस विशाल झूले का आनंद लेते नजर आए। वहीं, आसपास के दुकानदारों और छोटे व्यापारियों ने भी राहत की सांस ली, क्योंकि झूले के बंद होने से उनकी बिक्री पर असर पड़ रहा था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को सुरक्षा के साथ-साथ जनभावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि बोडगेश्वर जात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और आजीविका से भी जुड़ी हुई है।
एक स्थानीय व्यापारी ने कहा,
“हम प्रशासन की सुरक्षा संबंधी चिंता को समझते हैं, लेकिन समय पर समस्या का समाधान होना जरूरी था। अब झूला खुलने से जात्रा की रौनक लौट आई है।”
वहीं, एक श्रद्धालु ने कहा,
“हम अपने परिवार के साथ दूर से आए थे। बच्चों के लिए यह झूला खास आकर्षण था। अब दोबारा खुलने से बहुत खुशी हुई है।”
मामलतदार कार्यालय ने यह भी संकेत दिया है कि आगे से जात्रा और मेलों के दौरान लगाए जाने वाले सभी झूलों और अस्थायी संरचनाओं की पूर्व जांच अनिवार्य की जाएगी। बिना अनुमति या सुरक्षा मानकों के किसी भी गतिविधि को अनुमति नहीं दी जाएगी।
बोडगेश्वर मंदिर मापुसा का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां आयोजित जात्रा न केवल गोवा बल्कि आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मापुसा के बोडगेश्वर जात्रा स्थल पर विशाल झूले की सील हटाया जाना प्रशासन और जनता के बीच संतुलन का उदाहरण है। जहां एक ओर सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई, वहीं दूसरी ओर समय पर निर्णय लेकर जात्रा की गरिमा और आनंद को बनाए रखा गया। यह घटना दर्शाती है कि सही संवाद और नियमों के पालन से किसी भी समस्या का समाधान संभव है।










