एक बार फिर गोवा बोर्ड के स्कूल खुद बनाएंगे कक्षा 9वीं के प्रश्नपत्र, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव

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गोवा में माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक अहम फैसला एक बार फिर चर्चा में है। गोवा बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन (GBSHSE) ने निर्णय लिया है कि कक्षा 9वीं के वार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्र इस बार भी स्कूल स्तर पर ही तैयार किए जाएंगे। इस फैसले के तहत राज्य के सभी गोवा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों को अपने-अपने छात्रों के लिए प्रश्नपत्र बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यह निर्णय शिक्षा जगत में मिश्रित प्रतिक्रियाओं के साथ सामने आया है। कुछ शिक्षक और स्कूल प्रबंधन इसे छात्रों के हित में मान रहे हैं, वहीं कुछ अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इस पर सवाल भी उठाए हैं।

यह पहली बार नहीं है जब गोवा बोर्ड ने कक्षा 9वीं के प्रश्नपत्र स्कूलों को स्वयं तैयार करने की अनुमति दी हो। इससे पहले भी कोविड-19 महामारी के दौरान इसी तरह की व्यवस्था लागू की गई थी। उस समय बोर्ड का उद्देश्य छात्रों पर मानसिक दबाव कम करना और स्कूलों को शैक्षणिक स्वतंत्रता देना था।

अब एक बार फिर इस प्रणाली को लागू किए जाने से यह साफ हो गया है कि बोर्ड छात्रों की मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक लचीला और स्कूल-केंद्रित बनाना चाहता है।

गोवा बोर्ड अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य सतत और समग्र मूल्यांकन (Continuous and Comprehensive Evaluation) को बढ़ावा देना है। बोर्ड का मानना है कि स्कूल अपने छात्रों की शैक्षणिक क्षमता, कमजोरियों और सीखने के स्तर को बेहतर तरीके से समझते हैं, इसलिए वे अधिक उपयुक्त प्रश्नपत्र तैयार कर सकते हैं।

एक वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी ने कहा,
“कक्षा 9वीं एक संक्रमणकालीन कक्षा होती है। छात्रों को बोर्ड परीक्षा के दबाव में लाने से पहले उन्हें मजबूत आधार देना जरूरी है।”

राज्य भर के गोवा बोर्ड स्कूलों ने इस फैसले के बाद अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई स्कूलों ने विषय-विशेष शिक्षकों की समितियां बनाई हैं जो पाठ्यक्रम के अनुसार प्रश्नपत्र तैयार करेंगी।

स्कूल प्रबंधन का कहना है कि प्रश्नपत्र बनाते समय बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा ताकि मूल्यांकन में पारदर्शिता बनी रहे।

कई शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे वे ऐसे प्रश्न तैयार कर पाएंगे जो छात्रों की वास्तविक समझ को परखें, न कि केवल रटंत ज्ञान को।

एक शिक्षक ने बताया,
“अब हम छात्रों की सोचने की क्षमता, विश्लेषण और अवधारणात्मक समझ को ध्यान में रखकर प्रश्न बना सकते हैं।”

हालांकि कुछ शिक्षकों को यह भी चिंता है कि सभी स्कूलों में प्रश्नपत्रों का स्तर एक जैसा नहीं रहेगा, जिससे मूल्यांकन में असमानता पैदा हो सकती है।

कुछ अभिभावकों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि स्कूल द्वारा बनाए गए प्रश्नपत्रों में पक्षपात या अत्यधिक आसान प्रश्नों की संभावना हो सकती है, जिससे छात्रों की वास्तविक तैयारी का सही आकलन नहीं हो पाएगा।

एक अभिभावक ने कहा,
“अगर हर स्कूल अलग स्तर का प्रश्नपत्र बनाएगा तो छात्रों की तुलना कैसे होगी?”

इन चिंताओं को दूर करने के लिए गोवा बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वह पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेगा। बोर्ड की ओर से प्रश्नपत्र पैटर्न, कठिनाई स्तर और पाठ्यक्रम कवरेज को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

इसके अलावा, कुछ स्कूलों के प्रश्नपत्रों की रैंडम जांच भी की जाएगी ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

छात्रों के लिए यह फैसला राहत भरा साबित हो सकता है। बोर्ड परीक्षा का डर कम होने से वे पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि सीखने की प्रक्रिया के रूप में देख सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए बेहतर रूप से तैयार हो पाएंगे।

यह निर्णय गोवा की शिक्षा प्रणाली में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है, जहां परीक्षा को केवल अंकों तक सीमित न रखकर सीखने की गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो भविष्य में अन्य कक्षाओं के लिए भी इसी तरह के सुधार लागू किए जा सकते हैं।

गोवा बोर्ड द्वारा कक्षा 9वीं के प्रश्नपत्र स्कूलों को स्वयं बनाने की अनुमति देना एक महत्वपूर्ण और साहसिक कदम है। हालांकि इसमें कुछ चुनौतियां और आशंकाएं हैं, लेकिन सही निगरानी और पारदर्शिता के साथ यह निर्णय छात्रों के शैक्षणिक विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या यह गोवा की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देती है।

Goa Khabar Nama
Author: Goa Khabar Nama

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