गोवा, 23 दिसंबर 2025: गोवा सरकार के निवेश संवर्धन बोर्ड (आईपीबी) की हालिया बैठक ने राज्य की आर्थिक वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिसमें उत्पादन संलग्न प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत तीन प्रमुख निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री ने इन प्रस्तावों को राज्य के लिए ‘बड़ी निवेश अवसर’ करार देते हुए कहा कि सरकार इनकी सावधानीपूर्वक जांच कर सकारात्मक निर्णय लेगी। यह बैठक न केवल गोवा की निवेश-अनुकूल नीतियों को रेखांकित करती है, बल्कि केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल से राज्य को जोड़ने का माध्यम भी बनेगी।
आईपीबी, जो गोवा सरकार का प्रमुख निकाय है, निवेशकों को एकल खिड़की सुविधा प्रदान करता है। यह बोर्ड औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी देने, भूमि आवंटन और प्रोत्साहनों की सिफारिश करने का कार्य करता है। 2025 में गोवा की अर्थव्यवस्था में पर्यटन पर अत्यधिक निर्भरता (लगभग 30% जीडीपी योगदान) के बीच विविधीकरण की आवश्यकता महसूस हो रही है। खनन क्षेत्र की अस्थिरता और पर्यावरणीय चुनौतियों के कारण, सरकार विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी जैसे क्षेत्रों पर जोर दे रही है। इस बैठक में चर्चा की गई परियोजनाओं में वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स, फार्मा मैन्युफैक्चरिंग और पर्यटन-संबंधित विकास शामिल थे, जो दिसंबर 2025 की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पीएलआई योजना की बात करें तो यह भारत सरकार की एक क्रांतिकारी पहल है, जो मार्च 2020 में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, निर्यात को प्रोत्साहित करना और आपूर्ति श्रृंखला में स्वदेशीकरण को मजबूत करना है। योजना के तहत, विभिन्न क्षेत्रों में कंपनियों को उनके उत्पादन पर आधारित वृद्धि के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाते हैं – आमतौर पर 4% से 6% तक की दर से बिक्री पर सब्सिडी। अब तक 14 क्षेत्रों में लागू, जैसे मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स और सोलर मॉड्यूल्स, इस योजना ने 2025 तक 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। विकिपीडिया के अनुसार, पीएलआई ‘परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव’ का रूप है, जो कंपनियों को वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान करता है, जिससे वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत हों। गोवा के संदर्भ में, यह योजना विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, जहां राज्य पहले से ही एक हब के रूप में उभर रहा है।
मुख्यमंत्री सावंत ने बैठक में स्पष्ट किया कि पीएलआई के तहत प्राप्त तीन प्रस्तावों में कुल निवेश 100 करोड़ रुपये से अधिक का होना अनिवार्य है। इनमें रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा, “ये प्रस्ताव गोवा के लिए बड़ा निवेश अवसर हैं। हम इनकी क्षमता का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करेंगे और सकारात्मक निर्णय लेंगे।” यह बयान बजट घोषणा से जुड़ा है, जिसमें 100 करोड़ से अधिक निवेश लाने वाले निवेशकों को प्रोत्साहन दिए जाएंगे, बशर्ते वे स्थानीय रोजगार उत्पन्न करें। गोवा में बेरोजगारी दर 2025 में लगभग 13% है, और ऐसे निवेश से हजारों नौकरियां पैदा हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, फार्मा क्षेत्र में एक औसत प्लांट 500-1000 नौकरियां सृजित कर सकता है, जो युवाओं के लिए वरदान साबित होगा।
बैठक में अन्य परियोजनाओं की समीक्षा भी की गई। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोवा में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के लिए कई प्रस्ताव लंबित हैं, जो राज्य को पूर्वी एशिया के व्यापार गलियारों से जोड़ेंगे। शिक्षा अवसंरचना और पर्यटन-लिंक्ड विकास परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई, जो पर्यटन पुनरुद्धार के बीच महत्वपूर्ण हैं। 2025 में गोवा का पर्यटन क्षेत्र कोविड के बाद 20% की वृद्धि दर्ज कर चुका है, लेकिन विविधीकरण के बिना यह टिकाऊ नहीं। आईपीबी ने इन परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने का आश्वासन दिया, जिसमें भूमि बैंक से आवंटन और पर्यावरणीय मंजूरी शामिल हैं। गोवा आईपीबी की वेबसाइट के अनुसार, नई निवेश/विस्तार के लिए आवेदन प्रक्रिया सरल बनाई गई है, जो निवेशकों को आकर्षित कर रही है।
गोवा की अर्थव्यवस्था पर गौर करें तो यह छोटा राज्य (जनसंख्या 1.5 मिलियन) अपनी अनूठी भौगोलिक स्थिति के कारण निवेश का आकर्षक केंद्र है। 2025 में, राज्य का जीडीपी लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये का अनुमान है, जिसमें पर्यटन, खनन और प्राथमिक क्षेत्र प्रमुख हैं। लेकिन खनन पर प्रतिबंधों के बाद, फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र ने 40% वृद्धि दिखाई है। गोवा को ‘फार्मा हब’ के रूप में जाना जाता है, जहां हबलियन, सिप्ला जैसी कंपनियां सक्रिय हैं। पीएलआई के तहत फार्मा क्षेत्र में 15,000 करोड़ का निवेश आ चुका है, और गोवा इसमें हिस्सेदार बन सकता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी) तुएम में विकास हो रहा है, जो उच्च-स्तरीय सॉफ्टवेयर निवेश को आमंत्रित करेगा।
2025 में निवेश के अवसरों पर नजर डालें तो संपत्ति क्षेत्र उछाल पर है। फेस्टिवल सीजन में प्लॉट्स और वाणिज्यिक संपत्तियों में 15-20% की वृद्धि देखी गई, खासकर नॉर्थ गोवा में। बेस्ट कमर्शियल प्रॉपर्टीज में रिटेल शॉप्स और ऑफिस स्पेस शामिल हैं, जो भूतानी एक्वा जैसे प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं। होलीडे होम्स और बीचसाइड प्रॉपर्टीज में उच्च रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (आरओआई) 8-12% है, जो 2025 को आदर्श निवेश वर्ष बनाता है। पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जैसे एयरपोर्ट विस्तार और हाईवे, निवेश को और बढ़ाएंगे।
इस बैठक का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह केंद्र-राज्य सहयोग को मजबूत करता है। पीएलआई योजना आत्मनिर्भर भारत का हिस्सा है, जो 2025 तक 2 लाख करोड़ का निवेश लक्ष्य रखती है। गोवा सरकार ने भी ‘इन्वेस्ट इन गोवा’ पोर्टल लॉन्च किया है, जो डिजिटल आवेदन सुविधा प्रदान करता है। लेकिन चुनौतियां भी हैं – भूमि उपलब्धता, कुशल श्रमिकों की कमी और पर्यावरणीय नियम। मुख्यमंत्री ने इन पर समाधान का वादा किया, जैसे स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स।
आईपीबी बैठक गोवा को विनिर्माण हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। तीन पीएलआई प्रस्ताव न केवल आर्थिक वृद्धि लाएंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देकर सामाजिक उत्थान भी करेंगे। यदि ये प्रस्ताव मंजूर हुए, तो 2026 तक गोवा का जीडीपी 10% बढ़ सकता है। सरकार का यह प्रयास राज्य को ‘इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करेगा, जहां पर्यटन के साथ विनिर्माण का संतुलन बनेगा। निवेशक अब गोवा की ओर रुख कर रहे हैं, और यह प्रवृत्ति जारी रहनी चाहिए।










