गोवा के कारंबोलिम क्षेत्र में प्रस्तावित मेगा प्रोजेक्ट को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कारंबोलिम मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ जारी ‘स्टॉप वर्क ऑर्डर’ (काम बंद करने का आदेश) को फिलहाल हटाया नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के इस आश्वासन से स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने यह बयान उस समय दिया जब कारंबोलिम और आसपास के क्षेत्रों से आए प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर अपनी चिंताओं से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों की आजीविका, पारंपरिक जलस्रोतों और जैव विविधता पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
कारंबोलिम क्षेत्र गोवा के उन इलाकों में से एक है, जहाँ झीलें, दलदली भूमि, खेत और जैव विविधता प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। पर्यावरणविदों का कहना है कि प्रस्तावित मेगा प्रोजेक्ट से कारंबोलिम झील और आसपास के वेटलैंड्स को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है। यह क्षेत्र कई प्रवासी पक्षियों का प्राकृतिक आश्रय भी माना जाता है।
स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) को पारदर्शी ढंग से सार्वजनिक किया जाए। उनका आरोप है कि इस परियोजना में नियमों की अनदेखी की गई और स्थानीय ग्राम सभाओं को विश्वास में नहीं लिया गया।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा,
“जब तक सभी कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं की पूरी तरह से जांच नहीं हो जाती, तब तक कारंबोलिम मेगा प्रोजेक्ट पर जारी स्टॉप वर्क ऑर्डर बरकरार रहेगा। सरकार पर्यावरण के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।”
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि राज्य सरकार स्थानीय लोगों की भावनाओं और पर्यावरणीय संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास जो प्रकृति और लोगों के हितों के खिलाफ हो, उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद कारंबोलिम और आसपास के गांवों में सकारात्मक माहौल देखा गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना सहमति और बिना पारदर्शिता के थोपा गया विकास स्वीकार्य नहीं है।
एक स्थानीय किसान ने कहा,
“यह जमीन और झीलें हमारी रोजी-रोटी हैं। अगर इन्हें नुकसान पहुँचा तो हमारा भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।”
वहीं, एक सामाजिक कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री के आश्वासन को “पहला सकारात्मक कदम” बताते हुए कहा कि अब सरकार को जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करनी होगी।
सूत्रों के अनुसार, कारंबोलिम मेगा प्रोजेक्ट को लेकर विभिन्न विभागों से मिली मंजूरियों की भी समीक्षा की जा रही है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग और पर्यावरण विभाग से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
सरकार यह भी देख रही है कि कहीं कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन (CRZ) या वेटलैंड नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। यदि किसी भी स्तर पर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो परियोजना पर और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जा सकती है, जो पूरे प्रोजेक्ट की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा करेगी। इस समिति में पर्यावरण विशेषज्ञ, शहरी नियोजन विशेषज्ञ और स्थानीय प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।
सरकार का कहना है कि अंतिम निर्णय सभी रिपोर्टों और जनभावनाओं को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।
कारंबोलिम मेगा प्रोजेक्ट को लेकर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का यह आश्वासन स्पष्ट संकेत देता है कि गोवा सरकार पर्यावरण और जनता के हितों को नजरअंदाज नहीं करेगी। फिलहाल ‘स्टॉप वर्क ऑर्डर’ जारी रहना उन सभी लोगों के लिए राहत की खबर है, जो इस परियोजना के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
अब सभी की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह मेगा प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा या हमेशा के लिए रुक जाएगा।









