गोवा समेत देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर इस सीजन में पर्यटकों की संख्या संतोषजनक बताई जा रही है। होटल, गेस्टहाउस, समुद्र तट और प्रमुख दर्शनीय स्थलों पर भीड़ साफ नजर आ रही है। बावजूद इसके, पर्यटन से जुड़े हितधारकों के चेहरों पर वह खुशी नहीं दिख रही, जिसकी उम्मीद इस भीड़ से की जा रही थी। होटल व्यवसायी, शैक संचालक, टैक्सी चालक, टूर ऑपरेटर और छोटे व्यापारी सभी एक सुर में कह रहे हैं कि “पर्यटक तो बहुत हैं, लेकिन कमाई बेहद कम है।”
पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि इस सीजन में फुटफॉल बढ़ा है, लेकिन औसत खर्च में भारी गिरावट आई है। पहले जहां पर्यटक लंबे समय तक रुकते थे और खुलकर खर्च करते थे, अब अधिकतर पर्यटक कम अवधि के लिए आ रहे हैं और बजट में यात्रा कर रहे हैं।
एक होटल संचालक ने बताया,
“कमरे भरे हुए हैं, लेकिन रूम रेट बहुत कम हैं। पहले एक कमरे के लिए जो दाम मिलते थे, अब वही आधे पर देना पड़ रहा है।”
पर्यटन हितधारकों के अनुसार, इस बार अधिकतर घरेलू और बजट विदेशी पर्यटक आए हैं। ये पर्यटक सस्ते होटल, होमस्टे और ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए यात्रा कर रहे हैं। भोजन, टैक्सी, स्थानीय खरीदारी और मनोरंजन पर उनका खर्च सीमित है।
शैक संचालकों का कहना है कि समुद्र तटों पर भीड़ होने के बावजूद बिक्री उम्मीद से काफी कम रही है। एक शैक मालिक ने कहा,
“लोग बैठते हैं, फोटो लेते हैं, लेकिन ऑर्डर बहुत कम करते हैं।”
पर्यटन से जुड़े छोटे व्यापारियों पर इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। टैक्सी चालक, बाइक रेंटल, वाटर स्पोर्ट्स ऑपरेटर और स्मारिका विक्रेता कम आय की शिकायत कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि पूरे दिन काम करने के बावजूद खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।
एक टैक्सी चालक ने बताया कि पहले दिन में 5–6 लंबी ट्रिप मिल जाती थीं, अब मुश्किल से 2–3 ही मिल रही हैं।
पर्यटन क्षेत्र की कमाई घटने के साथ-साथ लागत लगातार बढ़ रही है। बिजली, पानी, ईंधन, कर्मचारियों की मजदूरी और लाइसेंस शुल्क में बढ़ोतरी से मुनाफा और सिमट गया है। होटल और रेस्तरां संचालकों का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद वे रेट नहीं बढ़ा पा रहे, क्योंकि बाजार में भारी प्रतिस्पर्धा है।
पर्यटन हितधारकों का मानना है कि ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल और भारी डिस्काउंट ऑफर्स ने भी पारंपरिक पर्यटन व्यवसाय को नुकसान पहुंचाया है। कई बार होटल कम रेट पर कमरे देने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे उनकी सीधी बुकिंग घटती जा रही है।
हितधारकों ने सरकार और पर्यटन विभाग की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केवल संख्या बढ़ाने पर ध्यान देने के बजाय “क्वालिटी टूरिज्म” पर फोकस किया जाना चाहिए।
उनकी प्रमुख मांगें हैं:
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उच्च खर्च करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनीति
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अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में प्रभावी प्रचार
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ऑफ-सीजन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं
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स्थानीय व्यवसायियों को राहत और समर्थन
भीड़ बढ़ने से पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर भी दबाव बढ़ा है। ट्रैफिक जाम, कचरा प्रबंधन, पानी की कमी और समुद्र तटों पर अव्यवस्था जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। हितधारकों का कहना है कि यदि व्यवस्थाएं नहीं सुधारी गईं, तो इससे पर्यटन की छवि को नुकसान पहुंचेगा।
पर्यटन क्षेत्र में मंदी का सीधा असर रोजगार पर भी पड़ा है। कई होटल और शैक संचालकों ने कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है या काम के घंटे घटा दिए हैं। इससे स्थानीय युवाओं की आय प्रभावित हो रही है।
पर्यटन हितधारकों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले सीजन में निवेश और रोजगार दोनों पर असर पड़ेगा। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि उद्योग से जुड़े लोगों को विश्वास में लेकर दीर्घकालिक नीति बनाई जाए।
पर्यटकों की भीड़ होने के बावजूद पर्यटन उद्योग में संतोष का माहौल नहीं है। कम खर्च करने वाले पर्यटकों, बढ़ती लागत और नीतिगत चुनौतियों ने हितधारकों की चिंता बढ़ा दी है। अब जरूरत है ऐसी रणनीति की, जो न केवल संख्या बल्कि गुणवत्ता और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा दे, ताकि पर्यटन से जुड़े सभी वर्गों को वास्तविक लाभ मिल सके।










