गोवा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सरकार की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सदन में दिए गए एक लिखित और मौखिक उत्तर में मंत्री रेजिनाल्डो लौरेंको ने बताया कि अब तक विधानसभा में दिए गए कुल आश्वासनों में से लगभग 70 प्रतिशत को सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है, जबकि शेष आश्वासनों पर विभिन्न स्तरों पर कार्य प्रगति पर है।
रेजिनाल्डो लौरेंको ने कहा कि विधानसभा आश्वासन केवल औपचारिक वक्तव्य नहीं होते, बल्कि वे सरकार और जनता के बीच विश्वास की कड़ी होते हैं। सरकार इन आश्वासनों को गंभीरता से लेती है और उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करने का प्रयास करती है।
विधानसभा सत्र के दौरान जब कोई मंत्री या सरकार का प्रतिनिधि सदन में किसी मुद्दे पर कोई वादा या आश्वासन देता है, तो उसे विधानसभा आश्वासन माना जाता है। इन आश्वासनों को पूरा करना सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी होती है। इन्हीं आश्वासनों के आधार पर जनता सरकार की कार्यक्षमता और नीयत का आकलन करती है।
शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में किए गए कार्यों से आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन अड़चनों को दूर करने के लिए संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय कर रही है।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार से कड़े सवाल पूछे। विपक्ष का कहना था कि केवल प्रतिशत बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी बताया जाना चाहिए कि कौन-कौन से आश्वासन पूरे हुए हैं और कौन से अब भी अधूरे हैं।
विपक्षी विधायकों ने मांग की कि शेष आश्वासनों के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए, ताकि जनता को पता चल सके कि उनके मुद्दों का समाधान कब तक होगा।
रेजिनाल्डो लौरेंको ने विपक्ष की चिंताओं का जवाब देते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह पारदर्शी है और आश्वासनों की प्रगति पर नियमित समीक्षा की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक आश्वासन को संबंधित विभाग के माध्यम से मॉनिटर किया जाता है और उसकी स्थिति की रिपोर्ट समय-समय पर तैयार की जाती है।
मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार का उद्देश्य केवल आंकड़े प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि हर आश्वासन को व्यवहार में बदलना है।
रेजिनाल्डो लौरेंको ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होती है। विधानसभा में दिए गए आश्वासन सरकार की विश्वसनीयता का आधार होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने एक मॉनिटरिंग मैकेनिज़्म विकसित किया है, जिसके माध्यम से लंबित आश्वासनों की प्रगति पर नजर रखी जाती है।
मानसून सत्र के दौरान विधानसभा आश्वासनों की स्थिति एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरी। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस विषय पर लंबी और गंभीर बहस देखने को मिली। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आश्वासनों को पूरा करना जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
सरकार द्वारा 70 प्रतिशत आश्वासन पूरे करने का दावा निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन जनता की निगाहें अब शेष 30 प्रतिशत पर टिकी हैं। आम लोगों की अपेक्षा है कि सरकार अपने सभी वादों को समय पर पूरा करे और विकास कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखे।









