गोवा में 2025 के दौरान हमले, धमकी और उत्पीड़न के 594 मामले दर्ज, कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

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गोवा, जो अपनी शांत छवि, पर्यटन और सौहार्दपूर्ण सामाजिक वातावरण के लिए जाना जाता है, वर्ष 2025 में एक चिंताजनक अपराध आंकड़े के कारण चर्चा में आ गया है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, साल 2025 के दौरान राज्य में हमले (Assault), धमकी (Intimidation) और उत्पीड़न (Harassment) से जुड़े कुल 594 मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा न केवल आम नागरिकों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिसिंग व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

रिकॉर्ड किए गए 594 मामलों में शारीरिक हमले, मौखिक व लिखित धमकियां, मानसिक उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, सार्वजनिक स्थानों पर झगड़े और कार्यस्थल पर परेशान किए जाने जैसी घटनाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े केवल दर्ज मामलों को दर्शाते हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई पीड़ित सामाजिक दबाव, भय या बदनामी के डर से शिकायत दर्ज नहीं कराते।

इन मामलों का असर शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में देखने को मिला है। पणजी, मडगांव, वास्को और मापुसा जैसे शहरी इलाकों में सार्वजनिक स्थानों पर झगड़े, सड़क विवाद और नशे से जुड़े हमलों के मामले सामने आए, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन विवाद, घरेलू कलह और व्यक्तिगत रंजिश से जुड़े उत्पीड़न की घटनाएं अधिक रहीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्पीड़न और धमकी के मामलों में महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और कमजोर सामाजिक वर्गों की संख्या अधिक पाई गई। कार्यस्थलों पर मानसिक प्रताड़ना, सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ और घरेलू हिंसा जैसे मामलों ने यह संकेत दिया है कि सामाजिक सुरक्षा को लेकर अभी भी बड़े सुधार की जरूरत है।

गोवा एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन सीजन के दौरान भीड़, शराब और नशीले पदार्थों की उपलब्धता के कारण कई बार हिंसक घटनाएं बढ़ जाती हैं। कुछ मामलों में स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के बीच विवाद भी हमले और धमकी का कारण बने।

पुलिस विभाग का कहना है कि अधिकांश मामलों में त्वरित कार्रवाई की गई और कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। साथ ही, साइबर सेल और महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ को भी सक्रिय किया गया है। हालांकि, नागरिकों का एक वर्ग यह मानता है कि कई मामलों में कार्रवाई में देरी होती है, जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं।

राज्य सरकार ने अपराध नियंत्रण के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है, जिनमें सामुदायिक पुलिसिंग, डिजिटल शिकायत प्रणाली और त्वरित न्याय के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट शामिल हैं। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में अपराध के आंकड़ों में कमी आएगी और आम नागरिक खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पुलिस या प्रशासन पर जिम्मेदारी डालना पर्याप्त नहीं है। समाज को भी जागरूक होना होगा। हिंसा, धमकी और उत्पीड़न के खिलाफ चुप्पी तोड़ना, पीड़ितों का साथ देना और कानून का सहारा लेना बेहद जरूरी है।

2025 में गोवा में दर्ज 594 हमले, धमकी और उत्पीड़न के मामले एक चेतावनी हैं कि राज्य को अपनी शांति और सुरक्षा की छवि बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। सख्त कानून, प्रभावी पुलिसिंग और सामाजिक जागरूकता के जरिए ही ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंकड़े भविष्य में और भी गंभीर रूप ले सकते हैं।

Goa Khabar Nama
Author: Goa Khabar Nama

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