“मेरसेस पंचायत में ग्राम सभा की गैर-हाज़िरी पर बढ़ी नाराज़गी: लोगों की आवाज़ कब सुनी जाएगी?”

गोवा की मेरसेस पंचायत में पिछले एक वर्ष से ग्राम सभा का आयोजन न होने को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी नाराज़गी और असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्राम सभा किसी भी पंचायत क्षेत्र की रीढ़ मानी जाती है, जहां नागरिक सीधे अपनी समस्याएँ, सुझाव और विकास से जुड़े मुद्दे पंचायत के सामने रख सकते हैं। मगर मेरसेस पंचायत में पिछले कई महीनों से ग्राम सभा न होने के कारण लोगों को यह महसूस हो रहा है कि उनकी आवाज़ को जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि ग्राम सभा न होने से कई महत्वपूर्ण मुद्दे अनसुलझे रह गए हैं। सड़क मरम्मत, कचरा प्रबंधन, पानी की सप्लाई, अवैध निर्माण, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था और युवाओं के लिए सुविधाओं जैसे मामलों पर नागरिक पंचायत के साथ चर्चा कर प्रगति चाहते थे। लेकिन जब बैठकें ही नहीं होंगी, तो समाधान कैसे निकलेंगे?
कुछ निवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचायत द्वारा ग्राम सभा न बुलाना पंचायत अधिनियम की भी अनदेखी है, क्योंकि नियमों के अनुसार हर तीन महीने में एक ग्राम सभा आयोजित करना अनिवार्य है। अगर किसी वजह से बैठक स्थगित की जाती है, तो इसके बारे में जनता को सूचित करना भी पंचायत की जिम्मेदारी होती है।

ग्राम सभा न होने के कारण कई शिकायतें पेंडिंग पड़ी हैं। कुछ परिवारों ने बताया कि मकान नंबर, प्रमाण पत्र, वॉटर कनेक्शन या जमीन से जुड़े छोटे मुद्दों को ग्राम सभा में आसानी से सुलझाया जा सकता था, मगर पंचायत में सुनवाई न होने से लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं कुछ बुजुर्ग निवासियों ने कहा कि गाँव की समस्याएँ हल करवाने के लिए ग्राम सभा सबसे प्रभावी मंच है, जो अब बंद-सा हो चुका है।

समुदाय के कई युवाओं ने भी इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई है। उनका कहना है कि मेरसेस जैसी विकसित होती पंचायत में शिक्षा, खेल और रोजगार से जुड़े प्रस्तावों को ग्राम सभा के माध्यम से ही आगे बढ़ाया जा सकता है। अगर बैठकें ही नहीं होंगी, तो योजनाओं पर कब चर्चा होगी और युवाओं के हित कैसे सुरक्षित रहेंगे?

इसके अलावा, महिलाएँ भी इस स्थिति से नाराज़ हैं। स्थानीय महिला समिति की सदस्यों ने कहा कि महिला सुरक्षा, सार्वजनिक स्थानों की सफाई, आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति और सामाजिक योजनाओं के लाभ से जुड़े मुद्दों पर वे ग्राम सभा में आवाज उठाना चाहती थीं। लेकिन उन्हें मंच ही नहीं मिल पा रहा।

कई पर्यावरण प्रेमियों ने भी चिंता जताई है कि इलाके में कचरा निस्तारण की समस्या और हरियाली को बचाने के लिए चल रही लड़ाई पर ग्राम सभा में खुली चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में अवैध कचरा फेंकने की घटनाएँ बढ़ रही हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही।

कुछ नागरिकों ने पंचायत सदस्यों पर पारदर्शिता की कमी का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि जब ग्राम सभा नहीं होती, तो आम जनता को यह भी पता नहीं चलता कि पंचायत फंड कहाँ खर्च किए जा रहे हैं, कौन से प्रोजेक्ट मंजूर हुए हैं और किन विकास कार्यों पर प्राथमिकता दी जा रही है। इससे लोगों में पंचायत की कार्यशैली को लेकर संदेह बढ़ रहा है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर पंचायत जल्द ही ग्राम सभा आयोजित नहीं करती, तो नागरिक इसके खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज करवाने पर विचार कर रहे हैं। कुछ समूह एक हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की भी योजना बना रहे हैं ताकि पंचायत पर जनता की आवाज सुनने का दबाव बनाया जा सके।

ग्राम सभा केवल एक बैठक नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव है, जहां लोगों को अपनी समस्याएँ बिना किसी डर के रखने का अधिकार मिलता है। अगर यह मंच ही बंद हो जाए, तो विकास की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। इसीलिए समुदाय यह उम्मीद कर रहा है कि पंचायत इस मामले को गंभीरता से लेगी और जल्द ही ग्राम सभा बुलाएगी, ताकि हर निवासी की बात सुनी जा सके।

मेरसेस पंचायत में एक साल से ग्राम सभा का न होना सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोगों की आवाज़ को अनदेखा करने जैसा है। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पंचायत इस बढ़ते दबाव और लोगों की नाराज़गी के बाद क्या कदम उठाती है। क्या नागरिकों की आवाज़ को महत्व दिया जाएगा? क्या पारदर्शिता और जवाबदेही बहाल की जाएगी? यह आने वाले दिनों में पता चलेगा, लेकिन फिलहाल समुदाय इस उम्मीद में है कि उनकी शिकायतों और सुझावों को सुनने के लिए आखिरकार ग्राम सभा का आयोजन जल्द किया जाएगा।

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Author: Goa Khabar Nama